“मां ऐं मुहिंजो” ? सत्संग साईं चाँण्ड्रू राम साहेब 

“कैसे बने करोड़पति” , “धनवानों को वेंटी”, “संत कंवर राम सेमिनार 1997,  बॉम्बे में सत्संग” खां पोए हाणे तंवाह सां गदु साइन जन जो वोल्युम 2 सत्संग  “मां ऐं मुहिंजो” ?  “पेश था कयूँ  । “संतन जो हिकु वचन, तंवाहनजे जीवन खे बदले तो सघे”, 

आनंद वठो ऐं वठायो ।

सखी जा प्यारा प्रेमियों, तंवाह सभनि खे बुधाइन्डे खुशी थे ती त , परम पूज्य बाबा साईं जन जा पूरा सत्संग वॉल्यूम Youtube ते Upload कया था वञिन । जिये हर हिकु प्रेमी पहनजी सहूलियत सां सत्संग जो आनंद वठी सघे । 

Satsang by Sain Chandru Ram Saheb at Sant Kanwar Ram Saheb Seminar in 1997 ,National College, Mumbai Vol.1

सखी जा प्यारा प्रेमियों,

तंवाह सभनि खे बुधाइन्डे खुशी थे ती त , परम पूज्य बाबा साईं जन जा पूरा सत्संग वॉल्यूम Youtube ते Upload कया था वञिन । जिये हर हिकु प्रेमी पहनजी सहूलियत सां सत्संग जो आनंद वठी सघे ।

“कैसे बने करोड़पति” ऐं “धनवानों को वेंटी” खां पोए हाणे तंवाह सां गदु साइन जन जो 1997 में बॉम्बे में “संत कंवर राम साहेब” जन जे सेमिनार में कयल सत्संग शेयर था क्यूँ ।

“संतन जो हिकु वचन, तंवाहनजे जीवन खे बदले तो सघे”, आनंद वठो ऐं वठायो ।

“सोलहवें अन्तराष्ट्रीय चीफ जस्टिस कॉन्फ्रेंस” के उद्घाटन समारोह में “परम पूज्य बाबा साईं”

दिनांक 9 अक्टूबर 2015 शाम 5:30 बजे..
श्रद्धेय जगदीश गांधी (संस्थापक CMS) द्वारा “विश्व शांति और एकता” हेतु
“सोलहवें अन्तराष्ट्रीय चीफ जस्टिस कॉन्फ्रेंस” के उद्घाटन समारोह में “परम पूज्य बाबा साईं” तथा ‘शहज़ादा साईं मोहन लाल’ विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे।
जहां भारत सरकार के गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह तथा लखनऊ के मेयर भी उपस्थित थे।
और सभी सम्मानित अथितियों ने बाबा साईं के सानिध्य में दीप प्रज्वलन के उपरांत सामूहिक
एताहिसिक चित्र खिचवाया।
इस प्रोग्राम में श्रद्धेय जगदीश गांधी ने स्वागत सम्बोधन दिया तथा गणमान्य मुख्य अतिथि विशिष्ठ अतिथि तथा श्रीलंका की पूर्व राष्ट्रपति चन्द्रिका कुमारतुंगा ने सम्बोधन किया ।
मेयर डाo दिनेश शर्मा जी ने “बेनिन के चीफ जस्टिस”ओस्माने बटोको को लखनऊ की चाभी देकर सम्मानित किया।
स्वागत नृत्य, सर्वधर्म प्रार्थना, प्रार्थना नृत्य, विश्व एकता प्रार्थना का खूबसूरत और मनमोहक मंचन हज़ारो बच्चों द्वारा हुआ।

image

image

image

Sai Baba with Murari Babu at his Ashram

His Holiness Sant Sain Chandru Ram Saheb has profound respect for the true and pure saints, seers and ascetics, Sufis, faqirs and darveshas across the length and breadth of Sindh and India. An embodiment of humility and congeniality, His Holiness himself endeavours to seek the darshans of such highly evolved intellectuals and spiritual masters, saints and gurus, enters into saintly, noble discussions, confers with them and willingly accepts and imbibes the valuable knowledge imparted by such saints. His Holiness’ strong will,resoluteness and fearlessness are exemplary.
Ever smiling, ever humble, plain-hearted and earnest, his holiness’ genial personality is worth emulating. Believer of the dictum that “guru anek par sadguru ek” i.e. there are enumerable teachers but only one mentor or guru, His Holiness, magnanimously proclaims that one must imbibe and acquire the wealth of knowledge and good virtues from wherever one finds them regardless of the worthiness of the source for virtues and knowledge are priceless and welcome in any form.